Health Insurance Claim : भोपाल, 22 नवंबर: अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस ( Health Insurance ) खरीदने जा रहे हैं, तो अपनी पुरानी बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां छिपाना आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है। बीमा कंपनियों ने हाल के महीनों में कई ऐसे मामलों की पुष्टि की है, जहां ग्राहकों ने डायबिटीज़, हाइपरटेंशन या अन्य बीमारियां बताते समय गलत जानकारी दी — और बाद में इलाज के दौरान दावे (क्लेम) को अस्वीकार कर दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलिसी ( Health Insurance ) लेते समय ‘मेडिकल हिस्ट्री डिस्क्लोजर’ सबसे अहम शर्तों में से एक है। क्लेम प्रोसेस के दौरान इंश्योरेंस ( Health Insurance ) कंपनी आपके सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच करती है। अगर यह पता चलता है कि बीमारियों के बारे में गलत या अधूरी जानकारी दी गई है, तो कंपनी भुगतान करने से इनकार कर सकती है।
बीमा कंपनियों का सख्त रुख
बीमा क्षेत्र ( Health Insurance ) के जानकार बताते हैं कि जोखिम आकलन के लिए कंपनियां अब डिजिटल मेडिकल सत्यापन प्रक्रिया अपना रही हैं। कई पॉलिसियों में यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि “जानबूझकर जानकारी छिपाना वारंटी क्लॉज का उल्लंघन” माना जाएगा। इसका सीधा असर ग्राहक के दावे पर पड़ता है और पूरा क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है।
भारत में स्वास्थ्य बीमा ( Health Insurance ) के 60 प्रतिशत से अधिक विवाद इन्हीं कारणों से होते हैं — जिसमें प्रमुख रूप से प्रतीक्षा अवधि में इलाज कराना, पॉलिसी की अवधि समाप्त होना, या नेटवर्क हॉस्पिटल का उपयोग न करना शामिल है।
क्या करें ताकि क्लेम ना हो रिजेक्ट
- पॉलिसी खरीदने से पहले पूरी मेडिकल जानकारी ईमानदारी से दें।
- हर साल हेल्थ चेकअप रिपोर्ट अपडेट करें और उसे पॉलिसी में संलग्न कराएं।
- पॉलिसी डॉक्युमेंट के शर्तें ध्यान से पढ़ें, खासकर एक्सक्लूज़न और वारंटी सेक्शन।
- किसी भी बदलाव या नई बीमारी की जानकारी कंपनी को समय रहते सूचित करें।

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Health Insurance Claim : भोपाल, 22 नवंबर: अगर आप हेल्थ इंश्योरेंस ( Health Insurance ) खरीदने जा रहे हैं, तो अपनी पुरानी बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां छिपाना आपके लिए भारी नुकसान का कारण बन सकता है। बीमा कंपनियों ने हाल के महीनों में कई ऐसे मामलों की पुष्टि की है, जहां ग्राहकों ने डायबिटीज़, हाइपरटेंशन या अन्य बीमारियां बताते समय गलत जानकारी दी — और बाद में इलाज के दौरान दावे (क्लेम) को अस्वीकार कर दिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉलिसी ( Health Insurance ) लेते समय ‘मेडिकल हिस्ट्री डिस्क्लोजर’ सबसे अहम शर्तों में से एक है। क्लेम प्रोसेस के दौरान इंश्योरेंस ( Health Insurance ) कंपनी आपके सभी स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जांच करती है। अगर यह पता चलता है कि बीमारियों के बारे में गलत या अधूरी जानकारी दी गई है, तो कंपनी भुगतान करने से इनकार कर सकती है।
बीमा कंपनियों का सख्त रुख
बीमा क्षेत्र ( Health Insurance ) के जानकार बताते हैं कि जोखिम आकलन के लिए कंपनियां अब डिजिटल मेडिकल सत्यापन प्रक्रिया अपना रही हैं। कई पॉलिसियों में यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि “जानबूझकर जानकारी छिपाना वारंटी क्लॉज का उल्लंघन” माना जाएगा। इसका सीधा असर ग्राहक के दावे पर पड़ता है और पूरा क्लेम रिजेक्ट किया जा सकता है।
भारत में स्वास्थ्य बीमा ( Health Insurance ) के 60 प्रतिशत से अधिक विवाद इन्हीं कारणों से होते हैं — जिसमें प्रमुख रूप से प्रतीक्षा अवधि में इलाज कराना, पॉलिसी की अवधि समाप्त होना, या नेटवर्क हॉस्पिटल का उपयोग न करना शामिल है।
क्या करें ताकि क्लेम ना हो रिजेक्ट
- पॉलिसी खरीदने से पहले पूरी मेडिकल जानकारी ईमानदारी से दें।
- हर साल हेल्थ चेकअप रिपोर्ट अपडेट करें और उसे पॉलिसी में संलग्न कराएं।
- पॉलिसी डॉक्युमेंट के शर्तें ध्यान से पढ़ें, खासकर एक्सक्लूज़न और वारंटी सेक्शन।
- किसी भी बदलाव या नई बीमारी की जानकारी कंपनी को समय रहते सूचित करें।








