Health Insurance – कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य बीमा को हर परिवार की जरूरत बना दिया। लेकिन इसी बहाने देशभर में फर्जी गैंग्स सक्रिय हो गए हैं, जो गरीबों के दम तोड़ते सपनों पर हाथ साफ कर रहे। उत्तर प्रदेश के संभल जिले और दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके से अब तक दर्जनों मामले सामने आ चुके, जहां बीमा एजेंट, आशा कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान से लेकर बैंककर्मी तक शामिल पाए गए। पीड़ित परिवारों का दावा है कि लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी हो चुकी है।
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पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ये गिरोह मुख्य रूप से हिंदी भाषी राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान—में सक्रिय हैं। संभल में पिछले महीने एक बुजुर्ग की मौत के बाद उनके नाम पर 5 लाख का बीमा क्लेम करने की कोशिश पकड़ी गई। वहीं, दिल्ली के त्रिलोकपुरी में 20 से ज्यादा परिवारों ने शिकायत की कि फर्जी एजेंट्स ने सरकारी आयुष्मान भारत स्कीम का लालच देकर दस्तावेज हड़प लिए।
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कैसे रचते हैं जाल? – Health Insurance
गिरोह पहले बीमारों या जरूरतमंदों को तत्काल मदद का वादा करता। दवा या इलाज के नाम पर छोटी रकम वसूलता, फिर ‘फ्री सरकारी बीमा’ का झांसा देता। दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मेडिकल रिपोर्ट्स ले लेता। मौत के बाद क्लेम कर पैसा निकाल लेते। कम पढ़े-लिखे बुजुर्ग, बीमार महिलाएं और ग्रामीण परिवार इनके आसान शिकार। एक पीड़िता ने बताया, “आशा दीदी ने कहा सब मुफ्त होगा, लेकिन पिता की मौत के बाद कुछ नहीं मिला, उल्टा कर्ज चढ़ गया।”
क्यों फल-फूल रहा फर्जीवाड़ा? – Health Insurance
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बीमा खरीदना आसान बनाया, लेकिन सत्यापन कमजोर पड़ गया। इरदा ने 2025 में ऐसे 500 से ज्यादा केस दर्ज किए। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंटों की अनियमित ट्रेनिंग और ग्रामीण जागरूकता की कमी मुख्य वजह। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तरह के मामले बढ़ रहे, जहां स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि लिप्त पाए गए।
खुद को कैसे बचाएं? – Health Insurance
- – हमेशा आईआरडीए-अनुमोदित कंपनियों से ही पॉलिसी लें।
- – दस्तावेज कभी बिना पढ़े न दें; ऑनलाइन पोर्टल पर वेरिफाई करें।
- – क्लेम के समय अस्पताल बिल और डॉक्टर सर्टिफिकेट चेक करें।
- – संदिग्ध एजेंट पर तुरंत 1938 हेल्पलाइन या पुलिस को सूचित करें।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अब केंद्रीय जांच का आदेश दिया है। अगर समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो स्वास्थ्य सुरक्षा का सपना बोझ बन जाएगा। जागरूक रहें, ठगी से बचें।

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Health Insurance – कोरोना महामारी ने स्वास्थ्य बीमा को हर परिवार की जरूरत बना दिया। लेकिन इसी बहाने देशभर में फर्जी गैंग्स सक्रिय हो गए हैं, जो गरीबों के दम तोड़ते सपनों पर हाथ साफ कर रहे। उत्तर प्रदेश के संभल जिले और दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके से अब तक दर्जनों मामले सामने आ चुके, जहां बीमा एजेंट, आशा कार्यकर्ता, ग्राम प्रधान से लेकर बैंककर्मी तक शामिल पाए गए। पीड़ित परिवारों का दावा है कि लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी हो चुकी है।
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पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ये गिरोह मुख्य रूप से हिंदी भाषी राज्यों—उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान—में सक्रिय हैं। संभल में पिछले महीने एक बुजुर्ग की मौत के बाद उनके नाम पर 5 लाख का बीमा क्लेम करने की कोशिश पकड़ी गई। वहीं, दिल्ली के त्रिलोकपुरी में 20 से ज्यादा परिवारों ने शिकायत की कि फर्जी एजेंट्स ने सरकारी आयुष्मान भारत स्कीम का लालच देकर दस्तावेज हड़प लिए।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने बीमा खरीदना आसान बनाया, लेकिन सत्यापन कमजोर पड़ गया। इरदा ने 2025 में ऐसे 500 से ज्यादा केस दर्ज किए। विशेषज्ञों का कहना है कि एजेंटों की अनियमित ट्रेनिंग और ग्रामीण जागरूकता की कमी मुख्य वजह। मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसी तरह के मामले बढ़ रहे, जहां स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि लिप्त पाए गए।
खुद को कैसे बचाएं? – Health Insurance
- – हमेशा आईआरडीए-अनुमोदित कंपनियों से ही पॉलिसी लें।
- – दस्तावेज कभी बिना पढ़े न दें; ऑनलाइन पोर्टल पर वेरिफाई करें।
- – क्लेम के समय अस्पताल बिल और डॉक्टर सर्टिफिकेट चेक करें।
- – संदिग्ध एजेंट पर तुरंत 1938 हेल्पलाइन या पुलिस को सूचित करें।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अब केंद्रीय जांच का आदेश दिया है। अगर समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो स्वास्थ्य सुरक्षा का सपना बोझ बन जाएगा। जागरूक रहें, ठगी से बचें।

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