काठमांडू | नेपाल इस समय अभूतपूर्व राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। राजधानी काठमांडू और आसपास के क्षेत्रों में सोमवार से भड़की हिंसक झड़पों ने पूरे देश को हिला दिया। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन और प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास तक को आग के हवाले कर दिया। हालात इतने बिगड़े कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मंगलवार को तुरंत इस्तीफा दे दिया और सेना के हेलिकॉप्टर से उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
बड़े नेताओं को निशाना बनाया
अराजक माहौल में प्रदर्शनकारियों ने सिर्फ सरकारी दफ्तर ही नहीं, बल्कि शीर्ष राजनीतिक नेताओं को भी सीधे निशाना बनाया।
पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनाल के घर पर हमला कर आग लगा दी गई। इस हादसे में उनकी पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार गंभीर रूप से झुलस गईं। इलाज के लिए कीर्तिपुर बर्न अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा पर भीड़ ने उनके आवास में घुसकर हमला किया।
वित्त मंत्री विष्णु पौडेल पर काठमांडू की सड़कों पर खुलेआम हमला किया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक हमलावर को मंत्री के सीने पर लात मारते देखा जा सकता है।
मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ी
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, राजधानी और तराई इलाकों में हुई झड़पों और आगजनी में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। घायलों की संख्या 400 से अधिक बताई जा रही है, जिनमें कई की हालत बेहद गंभीर है। राजधानी के अस्पतालों में बिस्तरों की कमी और खून की उपलब्धता बड़ी चुनौती बन गई है।
संकट की जड़ और जनता का असंतोष
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ लंबे समय से simmer कर रहा असंतोष अचानक सड़कों पर तबाही में बदल गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सत्ताधारी नेताओं ने वादे पूरे नहीं किए और भ्रष्टाचार तेज़ी से बढ़ा।








